उपसर्ग की परिभाषा, प्रकार और उदाहरण

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हिंदी व्याकरण में उपसर्ग किसे कहते हैं (उपसर्ग की परिभाषा), उपसर्ग के प्रकार और उपसर्ग के उदाहरण को विस्तार से इस चैप्टर में समझाया गया है। आइए पढ़ते हैं:

उपसर्ग का परिचय:

हिंदी व्याकरण में उपसर्ग शब्द-निर्माण का एक महत्वपूर्ण साधन है। “उपसर्ग” शब्द दो भागों से बना है: “उप” (समीप या पास) और “सर्ग” (सृजन)। इसका अर्थ होता है शब्द के आरंभ में जोड़ा जाने वाला वह शब्दांश, जो उसके अर्थ में परिवर्तन या विस्तार करता है।

उपसर्ग की परिभाषा:

वे शब्दांश या अव्यय जो किसी शब्द के आरंभ में लगकर उसके अर्थ में विशेषता, परिवर्तन, या नई दिशा जोड़ते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं। उपसर्ग के उदाहरण:

  • सु + कर्म = सुकर्म (अच्छा कर्म)
  • नि + गृह = निगृह (नियंत्रण करना)

उपसर्ग के उपयोग और महत्व:

उपसर्ग का महत्व:

  • नए शब्द बनाने में सहायक।
  • वाक्य में गहराई और विविधता लाने के लिए उपयोगी।
  • मूल शब्द के अर्थ को विशेष रूप से स्पष्ट और प्रभावी बनाता है।

उपसर्ग के उपयोग:

  1. शब्दों के अर्थ का विस्तार।
    • उदाहरण: “नियम” से “अधिनियम”।
  2. भाव को निखारना।
    • उदाहरण: “सत्य” से “असत्य”।
  3. शब्द में नकारात्मकता या सकारात्मकता जोड़ना।
    • उदाहरण: “सम्मान” और “अपमान”।

उपसर्ग के प्रकार:

हिंदी में उपसर्ग मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं:

  1. संस्कृत उपसर्ग
  2. हिंदी उपसर्ग

(i). संस्कृत उपसर्ग:

संस्कृत से उत्पन्न उपसर्ग हिंदी में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।

उपसर्गअर्थउदाहरण
प्रपहले, आगेप्रगति, प्रार्थना
अनुपीछे, अनुसारअनुकरण, अनुशासन
अपदूर, बुराअपमान, अपराध
निनीचे, बाहरनिवास, निपुण
सुअच्छा, सुंदरसुस्वाद, सुकर्म
नहींअशुद्ध, असत्य
विअलग, विशेषविचार, विकल्प
अधिऊपर, अधिकअधिकार, अधिग्रहण
परादूर, विरोधपराजय, पराभव
अवनीचे, निकटअवरोध, अभ्यास

(ii). हिंदी उपसर्ग:

हिंदी में प्रचलित उपसर्ग साधारण और सरल होते हैं।

उपसर्गअर्थउदाहरण
हरहरना, समाप्त करनाहरभरा, हरपल
भरपूर्णभरपूर, भरसक
परविरोध, ऊपरपरदेश, परलोक
बेबिनाबेरहम, बेईमान
सहसाथसहयोग, सहपाठी

उपसर्ग और उनके अर्थ में परिवर्तन:

उपसर्ग मूल शब्द के अर्थ में न केवल विस्तार करते हैं, बल्कि उन्हें सकारात्मक, नकारात्मक या तटस्थ दिशा में भी मोड़ सकते हैं।

उपसर्गमूल शब्दबना हुआ शब्दअर्थ
सुकर्मसुकर्मअच्छा कार्य
मर्त्यअमर्त्यअमर, जो मरता नहीं
अपमानअपमानसम्मान का नाश
प्रचालप्रचालजो प्रचलन में हो
निवासनिवासरहने का स्थान

उपसर्ग की विशेषताएँ:

  1. संदर्भ के अनुसार अर्थ:
    • एक उपसर्ग अलग-अलग शब्दों के साथ अलग-अलग अर्थ दे सकता है।
    • उदाहरण: “प्र” → प्रगति (आगे बढ़ना), प्रहार (वार करना)।
  2. स्वतंत्र उपयोग नहीं:
    • उपसर्ग स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं किए जाते।
    • इन्हें किसी मूल शब्द के साथ जोड़ना आवश्यक है।
  3. अर्थ का परिवर्तन:
    • उपसर्ग का प्रयोग मूल शब्द के अर्थ में सकारात्मक, नकारात्मक या अन्य बदलाव ला सकता है।

उपसर्ग जोड़ने के नियम:

सहज मेल:

  • उपसर्ग को जोड़ते समय दोनों शब्दों का मेल स्वाभाविक होना चाहिए।
  • उदाहरण: “नि” + “वृत्ति” = “निवृत्ति”।

अर्थ का तारतम्य:

  • उपसर्ग जोड़ने के बाद मूल शब्द का अर्थ स्पष्ट और व्यावहारिक होना चाहिए।
  • उदाहरण: “सु” + “शील” = “सुशील”।

उपसर्ग आधारित अभ्यास:

उपसर्ग से नए शब्द बनाइए:

  1. सु + दर्शन → __
  2. अ + न्याय → __
  3. अप + मान → __
  4. परा + जय → __

उपसर्ग पहचानें और अर्थ बताएं:

  1. परलोक → __
  2. निष्कलंक → __
  3. सहपाठी → __

शब्दों में उपसर्ग जोड़कर अर्थ बदलें:

  1. सत्य → __
  2. मित्र → __
  3. कर्तव्य → __

उपसर्ग से संबंधित सामान्य त्रुटियाँ:

उपसर्ग के अर्थ का भ्रम:

  • उदाहरण: “अ” का अर्थ केवल “नहीं” नहीं है, यह “अति” का भी संकेत कर सकता है।
  • सही: “अश्व” का अर्थ घोड़ा है।

गलत संयोजन:

  • सही उपसर्ग का चुनाव न करना।
  • उदाहरण: “सु” का प्रयोग हमेशा सकारात्मक अर्थ में होता है।

अभ्यास प्रश्न:

  1. उपसर्ग क्या है? इसके महत्व को समझाइए।
  2. निम्नलिखित उपसर्गों से शब्द बनाइए:
    • अनु, अप, सु।
  3. उपसर्ग और मूल शब्द का सही मेल करें:
    • (i) प्र → (1) गमन
    • (ii) अप → (2) कर्म
    • (iii) परा → (3) त्याग

निष्कर्ष:

उपसर्ग हिंदी भाषा को समृद्ध, संक्षिप्त और प्रभावशाली बनाने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इसके प्रयोग से शब्दों का अर्थ विस्तार होता है और भाव अधिक स्पष्ट होते हैं। भाषा को सरल और प्रभावी बनाने में उपसर्ग का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

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